• विद्युत चाक से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता, 543 व्यक्तियों को स्वरोजगार से जुड़ने का मिलेगा अवसर : शंभूनाथ चक्रवर्ती

    छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड की कुम्भकार टेराकोटा योजना के अंतर्गत 181 माटीशिल्पियों को निःशुल्क विद्युत चाक वितरित किया गया। माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभू नाथ चक्रवर्ती ने 18 अक्टूबर को रायपुर और 22 अक्टूबर को महासमुंद में विद्युत चाक का वितरण किया।

    रायपुर, 24 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, ग्रामोद्योग विभाग) द्वारा संचालित कुम्भकार टेराकोटा योजना के अंतर्गत प्रदेश के छह जिलों के 181 माटीशिल्पियों को निःशुल्क विद्युत चाक वितरित किए गए। छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त शंभूनाथ चक्रवर्ती द्वारा 18 अक्टूबर को रायपुर तथा 22 अक्टूबर को महासमुंद में आयोजित कार्यक्रमों में पात्र हितग्राहियों को विद्युत चाक प्रदान किए गए।

    विद्युत चाक वितरण का उद्देश्य पारंपरिक माटीकला से जुड़े शिल्पकारों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी कार्यक्षमता एवं उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना तथा उनके आर्थिक सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करना है। विद्युत चाक के उपयोग से कार्य में लगने वाले समय एवं श्रम की बचत होगी, जिससे माटीशिल्पियों को अपनी उत्पादन गतिविधियों का विस्तार करने और आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।

    बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि राज्य शासन की मंशा पात्र हितग्राहियों को आवश्यक संसाधन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। विद्युत चाक की उपलब्धता से माटीशिल्पियों की कार्यदक्षता में वृद्धि होगी तथा वे कम समय में अधिक उत्पादन कर सकेंगे। इससे उनकी आय बढ़ाने और स्वरोजगार के अवसरों को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी।

    उन्होंने बताया कि एक विद्युत चाक के माध्यम से एक परिवार के औसतन तीन व्यक्तियों को स्वरोजगार से जोड़ने का अवसर प्राप्त होता है। इस प्रकार, 181 विद्युत चाकों के वितरण से कुल 543 व्यक्तियों को स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर मिलेगा। यह पहल माटीशिल्प से जुड़े परिवारों की आजीविका को सुदृढ़ करने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    चक्रवर्ती ने कहा कि माटीकला छत्तीसगढ़ की समृद्ध पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। इस कला से जुड़े शिल्पकारों को आवश्यक उपकरण एवं संसाधन उपलब्ध कराना उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने, पारंपरिक शिल्प के संरक्षण तथा इसके संवर्धन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कुम्भकार टेराकोटा योजना के माध्यम से माटीशिल्पियों को प्रोत्साहित करने, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    रायपुर में 92 एवं महासमुंद में 89 माटीशिल्पियों को दिए गए विद्युत चाक

    18 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित विद्युत चाक वितरण कार्यक्रम में चार जिलों के कुल 92 माटीशिल्पियों को लाभान्वित किया गया। इनमें रायपुर जिले के 52, बेमेतरा जिले के 36, कबीरधाम जिले के 3 तथा दुर्ग जिले के 1 हितग्राही शामिल हैं।

    इसी प्रकार, 22 अक्टूबर को महासमुंद में आयोजित कार्यक्रम में महासमुंद जिले के 71 तथा बलौदाबाजार जिले के 18 माटीशिल्पियों को निःशुल्क विद्युत चाक वितरित किए गए। इस प्रकार, दोनों कार्यक्रमों के माध्यम से रायपुर, बेमेतरा, कबीरधाम, दुर्ग, महासमुंद एवं बलौदाबाजार जिलों के कुल 181 माटीशिल्पियों को कुम्भकार टेराकोटा योजना का लाभ प्रदान किया गया।

    छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड की यह पहल पारंपरिक माटीकला के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ शिल्पकारों की कार्यदक्षता, उत्पादन क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में सहायक होगी। साथ ही, इससे माटीशिल्प से जुड़े परिवारों के लिए स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार होगा तथा प्रदेश की पारंपरिक शिल्पकला को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम आयोजन के दौरान बोर्ड के प्रबंध संचालक जय प्रकाश मौर्य, प्रबंधक साकेत कुमार राजपुरिया, बोर्ड के कर्मचारी तथा कुम्हार समाज के पदाधिकारी उपस्थित थे।