पितर पाख की एक शाम पूर्वजों के नाम ; राजधानी में हुआ आयोजन
रायपुर, 7 अक्टूबर 2026. इन दिनों देश भर में पूर्वजों को याद करने का पखवाड़ा चल रहा है. पितृ पक्ष के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की दो संस्थाओं -शिवार्पण साहित्य संस्था और छत्तीसगढ़ महिला मंच ने ' पितर पाख 'का आयोजन किया. इस अवसर पर 5 अक्टूबर की शाम पूर्वजों के नाम समर्पित रही. स्थानीय सिविल लाइन स्थित वृन्दावन सभागार में दो सत्रों में समारोह सम्पन्न हुआ. प्रथम सत्र में वनवासी कल्याण आश्रम के वरिष्ठ सदस्य कृष्ण कुमार वैष्णव और स्थानीय कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल को सम्मानित किया गया.
वैष्णव को वनवासी कल्याण और समाज सेवा के क्षेत्र में प्रतिभा मनोहर सम्मान और सुषमा पटेल को कविता लेखन के क्षेत्र में शिव कुमार शर्मा 'दुःखी 'स्मृति सम्मान से नवाजा गया. इनके अलावा कुछ अन्य विशिष्ट जनों को भी सम्मानित किया गया. सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, शॉल, श्रीफल और पौधे भेंट किए गए. शुभारंभ सत्र के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा थे. उन्होंने वैष्णव और सुषमा पटेल को सम्मानित किया और कहा कि सेवा, साहित्य, समाज और सम्मान सभी एक दूसरे के पूरक होते हैं.
इस सत्र में डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग ' और स्वराज्य करुण सहित कई साहित्यकार उपस्थित थे. अपने सम्बोधन में कृष्ण कुमार वैष्णव ने रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड के एक गाँव में निवासरत सौंरा जनजाति के परिवारों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए शासन -प्रशासन के सहयोग से किए गए अपने सार्थक प्रयासों की जानकारी दी.
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुधीर शर्मा ने की. इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्र उपस्थित रहे. उन्होंने समारोह को छत्तीसगढ़ी भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा कि पूर्वजों की याद में इस प्रकार का आयोजन करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है.
वरिष्ठ साहित्यकार और भाषा विज्ञानी डॉ. चित्तरंजन कर ने मुख्य अतिथि की आसंदी से अपने विचार व्यक्त किए. प्रथम सत्र में विशेष अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष शताब्दी पांडेय और साहित्यकार शशि दुबे ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया. दूसरे सत्र में साहित्यकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग ', कल्याणी तिवारी, स्वराज्य करुण और वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए.
दूसरे सत्र में सबसे पहले केवल कृष्ण द्वारा निर्मित और निर्देशित लघु फिल्म 'सुकून ' का प्रदर्शन हुआ. अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष करते एक बीमार व्यक्ति और सेवा में लगी उनकी पत्नी के मनोभावों का जीवंत चित्रण इस फिल्म में किया गया है. मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती ए. आई.आधारित यह छोटी -सी फिल्म सभागार में उपस्थित लोगों के दिलों को छू गई.इसके बाद काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कवियों और कवयित्रियों ने काव्यपाठ किया. आयोजन को यादगार बनाने के लिए सामूहिक फोटोग्राफी भी हुई.
कार्यक्रम का संचालन भारती यादव ने किया. आयोजन की तैयारी में शिवार्पण साहित्य संस्था और छत्तीसगढ़ महिला मंच के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्य रसिक प्रबुद्ध जन उपस्थित थे. आयोजन को सफल बनाने में आकांक्षा तिवारी और उनकी टीम सहित शिवार्पण साहित्य संस्था और छत्तीसगढ़ महिला मंच का सराहनीय योगदान रहा. कार्यक्रम में माधुरी कर, अनामिका, मंजूषा अग्रवाल, अंजलि वैद्य, पल्लवी झा, डॉ. रत्ना पांडेय, नीलिमा मिश्रा, सीमा निगम, श्रीमती रूनाली चक्रवर्ती और राममणि यादव, यशवंत चतुर्वेदी, उदयभान सिंह चौहान और कृष्ण कुमार सिन्हा को भी सम्मानित किया गया.