छत्तीसगढ़ में 19 शिक्षकों के फर्जी तबादले, कईयों ने ज्वाइनिंग भी कर ली, DPI में मचा हड़कंप, DEOs को नोटिस
छत्तीसगढ़ में 19 शिक्षकों के फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर से हड़कंप मच गया है। 6 अगस्त 2026 की तारीख में जारी आदेश को छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, अटल नगर के अवर सचिव आरपी वर्मा के नाम एवं हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
रायपुर, 18 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में एक फेक ट्रांसफर आर्डर से सनसनी फैल गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव आरपी वर्मा के हस्ताक्षर एवं नाम से जारी स्थानांतरण आदेश में 19 शिक्षकों को एक स्कूल से दूसरे स्कूलों में पदस्थ किया गया है। शासन के फॉर्मेट में हूबहू जारी आदेश में पेन से हस्ताक्षर किया गया है। जबकि शासन के अधिकांश आदेश डिजिटल सिग्नेचर से जारी किए जा रहे हैं। जिसमें जारीकर्ता का आधार वेरीफाइड नाम भी लिखा होता है। इस फर्जी स्थानांतरण आदेश का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। डीपीआई ने सभी 15 जिला शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है।
पता चला है कि इस फर्जी ट्रांसफर आर्डर के आधार पर कई शिक्षक रिलीव होकर नई जगह में कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं। जिससे समस्या बढ़ गई है। शिक्षा विभाग में यह पहली बार नहीं है कि इस तरह के फर्जी स्थानांतरण आदेश निकला हो इससे पहले 2020 में भी एक फर्जी ट्रांसफर आर्डर निकाल चुका है। उस समय राखी थाने में एफआईआर दर्ज करवायी गई थी। यह सब एक सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। ट्रांसफर कराने की जिद्द में शिक्षक दलालों के चक्कर में आ जाते हैं और ऐसी घटना घट जाती है। बताया जा रहा है कि एक सिंडिकेट के द्वारा यह ट्रांसफर आर्डर फर्जी ढंग से तैयार करवाया गया है।
डीपीआई ने मांगी तीन बिंदुओं पर मांगी जानकारी, डीईओ जवाब तलब
फेक ट्रांसफर आर्डर की घटना सामने आने के बाद डीपीआई ने सभी 15 डीईओ को नोटिस जारी कर तीन दिनों में जवाब तलब किया गया है। यदि संबंधित कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उन पर भी कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि मामला पुलिस को सौंपे जाने की तैयारी की जा रही है। 14 अक्टूबर 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय के उपसंचालक अशोक नारायण बंजारा ने 15 जिला शिक्षा अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई कर प्रतिवेदन मांगा है।
साथ ही उन्होंने तीन बिंदुओं में जवाब भी मांगा है कि यह फर्जी ट्रांसफर आर्डर के आधार पर किन-किन शिक्षकों ने कार्य मुक्ति एवं पदभार ग्रहण करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है। कितने कर्मचारियों को कार्य मुक्त अथवा कार्यभार ग्रहण कराया गया है। दस्तावेज उपलब्ध कराएं। उक्त ट्रांसफर आर्डर फर्जी होने की जानकारी मिलने पर आपने अब तक क्या कार्रवाई की है? जब फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर आपको किस माध्यम से प्राप्त हुआ।
सरकारी लेटरहेड और अवर सचिव के हस्ताक्षर का इस्तेमाल
विभाग के मुताबिक, फर्जी स्थानांतरण आदेश तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही अवर सचिव आर.पी. वर्मा के नाम, पदमुद्रा और हस्ताक्षर का भी कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
यह आदेश क्रमांक ESTB-102/755/2026/20-3 के साथ 6 अगस्त 2026 की तारीख का बताया गया था। इसके जरिए 19 शिक्षक और व्याख्याताओं का स्थानांतरण दर्शाया गया था। लोक शिक्षण संचालनालय ने जांच के लिए इस आदेश को फर्जी बताया है।
इन 15 जिलों के DEO से मांगी गई जानकारी
मामले की पड़ताल के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने बलौदाबाजार-भाटापारा, दुर्ग, बेमेतरा, बस्तर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, रायपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, राजनांदगांव, उत्तर बस्तर कांकेर, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, सरगुजा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है।
इस फर्जी ट्रांसफर आर्डर में किन-किन शिक्षकों के हैं नाम
इसमें दीप्ति साहू, रीता श्रीवास्तव, बीना देवांगन, देव कुमार बरिहा, सोनल सिंह परिहार, सुनीता सोनवानी, खिलेश्वरी सिवना, हेमलता यादव, हैप्पी वर्मा, खेमलाल साहू, विक्रम सिंह राजपूत, मनीषा राजपूत, सोनाली बनर्जी, शालिनी परगनिहा, सोनल साहू, हेमंत कुमार दखने, नीलकंठ धुर्वे, दुर्गेश पैकरा और कौशल राम चंद्रवंशी के नाम हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई शिक्षकों ने नई जगह पर आमद दे दी है। वास्तविक स्थिति डीईओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।
इस ट्रांसफर आर्डर की कॉपी को डीपीआई ने फेक बताया, देखें..