गरीबों के राशन पर डाका, शासकीय राशन दुकान से 155 क्विंटल 60 किलो चावल गायब
कवर्धा, 1 अक्टूबर 2026। कवर्धा जिले के रेंगाखार क्षेत्र में सरकारी राशन वितरण में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत सरईपतेरा की शासकीय उचित मूल्य दुकान में मार्च माह का 155 क्विंटल 60 किलो चावल ऑनलाइन रिकॉर्ड में आवंटित दर्ज है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें इस राशन का लाभ अब तक नहीं मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि सेल्समैन ने तीन महीने का राशन देने की बात कहकर हितग्राहियों से थम फिंगर यानी बायोमेट्रिक अंगूठा लगवा लिया, लेकिन बाद में सिर्फ दो महीने का ही राशन दिया गया और मार्च का आवंटन नहीं आने की बात कही गई। राशन नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने दुकान में ताला जड़ दिया और पूरे मामले की जांच की मांग की है।
मामला कबीरधाम जिले के रेंगाखार क्षेत्र के ग्राम पंचायत सरईपतेरा का है। यहां संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान से सरईपतेरा के अलावा चमारी और धामिनीडीह के ग्रामीण भी राशन लेते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मार्च माह के राशन को लेकर उन्हें लगातार आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन राशन नहीं मिला। अब ऑनलाइन रिकॉर्ड में 155 क्विंटल 60 किलो चावल का आवंटन दर्ज होने के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर यह चावल गया कहां?
ग्रामीणों ने खाद्य विभाग से स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मार्च माह का 155 क्विंटल 60 किलो चावल दुकान तक पहुंचा था, तो उसका भौतिक स्टॉक कहां है? और अगर हितग्राहियों को इसका वितरण नहीं हुआ, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड में इसका हिसाब कैसे दर्ज है?
ग्रामीण अब अपने हक के राशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। वहीं खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में सेल्समैन के साथ खाद्य विभाग के संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। जांच के बाद ही साफ होगा कि मार्च माह का राशन वास्तव में दुकान तक पहुंचा था या रिकॉर्ड में दर्ज आवंटन के बावजूद हितग्राहियों को उसका वितरण नहीं किया गया। अब सबसे बड़ा सवाल 155 क्विंटल 60 किलो चावल आखिर गया कहां?