• मुश्किलें हैं कि कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं; खुल गई  ज्ञानेश कुमार की 20 साल पुरानी फाइल

    सूत्रों के हवाले से बताया कि केरल के गृह मंत्रालय ने ली सी बीन की आत्महत्या के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ी फाइलें मांगी हैं। सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी आरोप लगाए गए थे।

    तिरुअनंतपुरम, 2 अक्टूबर 2026।  मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चुनाव आयोग में उनके फैसलों पर उठ रहे सवालों की वजह से विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी इस्तीफे की मांग कर रही है। इस बीच, केरल में उनकी दो दशक पुरानी फाइलें खुल गई हैं। केरल के गृह मंत्रालय ने 2006 में वर्क्स सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो की शुरुआती जांच से जुड़ी फाइलें तलब की हैं।

    दरअसल, विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो ने 20 साल पहले एक मलेशियाई सिविल इंजीनियर की आत्महत्या के बाद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुरुआती जांच की थी। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि केरल के गृह मंत्रालय ने ली सी बीन की आत्महत्या के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ी फाइलें मांगी हैं। ली सी बीन PATI-BEL के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर थे। PATI-BEL एक इंडो-मलेशियाई कंसोर्टियम है, जो अरबों डॉलर के केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तहत एमसी रोड को अपग्रेड करने में शामिल था।

    ली ने कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली। चर्चाएं थीं कि सरकारी अधिकारियों ने बिल पास करवाने की उनकी कोशिश को रोक दिया था। 1998 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार का भी नाम ली के सुसाइड नोट में आया था। इसमें ली ने प्रोजेक्ट को लागू करने को लेकर फैले भ्रष्टाचार पर भी लिखा था। उस समय की एलडीएफ सरकार ने इस मामले में विजिलेंस जांच बैठा दी थी।

    PWD विभाग में सचिव थे कुमार

    हालांकि, बाद में विजिलेंस की जांच रुक गई थी। सूत्रों का कहना है कि शुरुआती जांच और तलाशी के दौरान ज्यादा डॉक्युमेंट्स नहीं मिल सके। ज्ञानेश कुमार उस समय केरल में लोक निर्माण (PWD) विभाग के सचिव थे। इस मामले में हाल ही में सीपीएम के वरिष्ठ नेता टीएम थॉमस इसाक ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा था, जिसके बाद पूरा मामला चर्चा में आ गया था।

    सुसाइड नोट में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप
    इसाक ने अपनी पोस्ट में कहा था कि ज्ञानेश कुमार उन अधिकारियों में शामिल थे जिनका नाम मलेशियाई अधिकारी ली बीन सीन के सुसाइड नोट में था। इसाक के अनुसार, ली के सुसाइड नोट में पीडब्यूडी अधिकारियों के भ्रष्टाचार, मिसमैनेजमेंट और हैरेसमेंट पर विस्तार से आरोप लगाए गए थे। इसी में ज्ञानेश कुमार का नाम भी शामिल था। आरोपों की वजह से विजिलेंस जांच हुई और 2006 के आखिर से पहले ज्ञानेश कुमार का पीडब्ल्यूडी से ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद वह केंद्रीय रक्षा मंत्रालय चले गए थे।