अभिजीत दीपके की हुई रिहाई, शनिवार को क्या हुआ
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके को शनिवार को रिहा कर दिया गया. इसकी जानकारी सीजेपी की लीगल सेल की हेड रत्ना सिंह ने दी.
सीजेपी ने कहा कि रिहाई के बाद अभिजीत दीपके वहां से चले गए. एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीष गवांडे ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "अभिजीत को मनमाने ढंग से हिरासत में रखे जाने के 24 घंटे बाद रिहा कर दिया गया है. मुझे उम्मीद है कि सौरव और आशुतोष को भी जल्द ही तिहाड़ जेल में उनकी ग़ैरक़ानूनी हिरासत से रिहा कर दिया जाएगा." दरअसल अभिजीत दीपके दिल्ली में अनीष के घर रुके हुए थे.
रिहाई के बाद अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, "अब हम काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं और राहत मिली है, क्योंकि कल से हम बहुत तनाव में थे. मेरी सास को गुज़रे अभी 10 दिन भी नहीं हुए हैं और उसके बाद हमें यह ख़बर मिली, जिससे हम बहुत परेशान हो गए थे."
दीपके ने शुक्रवार शाम को 'लहरा दो तिरंगा' मार्च का आह्वान किया था लेकिन उन्हें मार्च से पहले ही प्रिवेंटिव डिटेंशन में ले लिया गया था. सीजेपी के दो दूसरे प्रमुख चेहरे सौरव दास और आशुतोष रांका पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं. उन्हें जंतर-मंतर में बिना अनुमति दाख़िल होने के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
शनिवार को क्या- क्या हुआ
शनिवार को दोपहर अभिजीत दीपके को कनॉट प्लेस के पास मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया. वहां उन्हें स्पेशल एग्ज़ीक्युटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. बार एंड बेंच के मुताबिक़, एसईएम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ ज़मानत दी. लाइव लॉ के अनुसार, दीपके को बॉन्ड की शर्तें माननी होंगी. इनमें से एक शर्त ये भी है कि उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखनी होगी.
शनिवार शाम को ही वापमंथी छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में ले लिया गया था लेकिन उन्हें शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया. मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर शनिवार को उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई जब वकीलों और सुरक्षा बलों के बीच बहस होने लगी.
इस बीच रत्ना सिंह ने सुनवाई में देरी पर सवाल उठाते हुए एक्स पर लिखा, "सुनवाई दोपहर 12 बजे होनी थी. लेकिन शाम 3.38 बजे तक इसके कोई संकेत नहीं मिल रहे. अगर यह जानबूझकर नहीं है तो क्या है."
मौके पर मौजूद बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित के अनुसार हिरासत में लिए गए लोगों से मिलने या उनकी पैरवी करने की अनुमति वकीलों को नहीं देने की वजह से पुलिस स्टेशन के बाहर तनाव का माहौल पैदा हो गया. उन्होंने बताया कि मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत है और यहां गेट पर कुछ समय के लिए हंगामा हुआ.
आंदोलन के प्रमुख युवा चेहरों के पुलिस कार्रवाई के दायरे में आने के बावजूद शुक्रवार को कनॉट प्लेस और उसके आसपास सैकड़ों लोग जमा हुए. इनमें से कई लोगों के हाथों में तिरंगा था. इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. इंडिया टुडे ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रदर्शन के दौरान करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया.
अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े के ख़िलाफ़ अपने आंदोलन को सीजेपी 2.0 कहा था, लेकिन पुलिस की सख़्त कार्रवाई से इस आंदोलन का भविष्य क्या होगा, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा.