• नीले ड्रम केस में फांसी की सजा: सभी को पार्टनर चुनने और अलग होने का हक है लेकिन जान लेने का कतई नहीं

    जज बोले- अपराधी को अपराध के लिए दंड देना ही धर्म है.. मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने पति की हत्या करने वाली मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को बुधवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। मेरठ निवासी सौरभ राजपूत की 3 मार्च 2025 की रात को पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने हत्या कर दी थी।
    मेरठ, 15 अक्टूबर 2026। मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम वाले मर्डर केस में अदालत ने साहिल और मुस्कान को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने सौरभ राजपूत हत्याकांड के दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई. कोर्ट ने इस दौरान महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि अपराधी को अपराध के लिए दंड देना ही धर्म है. इस फैसले के दौरान साहिल और मुस्कान की कोर्ट में वर्चुअल पेशी हुई. फांसी की सजा सुनते ही साहिल और मुस्कान जोर-जोर से रोने लगे.

    अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि वारदात किसी उकसावे में आकर अचानक नहीं बल्कि अत्यंत शातिर तरीके से सोच-समझकर साजिश रचकर की गई है। मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या करने के बाद दोनों हाथों की कलाइयां काट दीं और सिर धड़ से काटकर अलग कर दिए। 

    साक्ष्य छिपाने के लिए उसे ड्रम में भरकर सीमेंट से चिन दिया। यह अत्यंत क्रूर और बर्बर श्रेणी का अपराध है। इस वारदात से पूरे प्रदेश और देश में समाज के भीतर गहरा भय, असुरक्षा और अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ। पति-पत्नी जैसे पवित्र व विश्वासपूर्ण रिश्ता व पारिवारिक मूल्य तथा सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह हिल गए। 

    नीला ड्रम समाज में खौफ का प्रतीक बन गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए दोनों दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला जज ने कहा कि दोनों दोषियों को उनकी बैरक में भेज दिया जाए। शाम लगभग 4:15 बजे जिला जज ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुना दी।

    सभी को पार्टनर चुनने और अलग होने का हक है लेकिन जान लेने का कतई नहीं
    इंदौर के रहने वाले राजा और सोनम रघुवंशी शादी के बाद मेघालय हनीमून मनाने गए थे। वहां राजा का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। आरोप सोनम पर लगा। पुणे के केतन अग्रवाल की शादी से पहले ही मंगेतर ने हत्या करवा दी तो मेरठ में दो मामलों में सर्पदंश दिखाकर पतियों की हत्या कर दी गई। 
     
    सवाल यह उठने लगा कि क्या लोगों में शादी जैसी व्यवस्था के प्रति विश्वास नहीं रह गया है? जिस समाज ने प्रेम विवाह, अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह को भी स्वीकार कर लिया है, वह अब तलाक या अलग होने जैसे फैसलों को भी मान्यता दे ही रहा है। 
     
    ऐसे में बेहतर होता कि जान लेने की जगह अलग अलग राह चुन ली जाती। सभी को पार्टनर चुनने और अलग होने का हक है और किसी के साथ अपनी मर्जी से रहने की आजादी भी, लेकिन जान लेने की कतई भी नहीं। न तो शादी से पहले और न ही शादी के बाद। प्रेम के नाम पर हत्या करने की यह प्रवृत्ति सभ्य समाज का परिचायक नहीं हो सकती। 
     
    देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आए इस तरह के खौफनाक हत्याकांड इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हमारे सामाजिक ताने-बाने में बहुत कुछ गहरा और खतरनाक तरीके से टूट रहा है। इसलिए समाज के दामन पर लगे ऐसे दाग धोने के लिए कोर्ट के कड़े फैसले जरूरी हो जाते हैं।