कर्नाटक में SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी, करीब 1 करोड़ लोगों के नाम कटे
कर्नाटक में एसआईआर के बाद 5.54 करोड़ मतदाताओं में करीब 1 करोड़ लोगों के नाम डिलीट हुए हैं। अब 4.5 करोड़ के तकरीबन बचे हैं। करीब 18 प्रतिशत वोटर्स के नाम कटे हैं।
बेंगलुरू, 28 नवंबर 2026। कर्नाटक में एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इसमें कुल 4,55,00,011 मतदाता दर्ज हैं, जबकि SIR से पहले राज्य में 5,54,32,314 वोटर रजिस्टर्ड थे। इस तरह अंतिम सूची में करीब 99.32 लाख नाम कम हो गए हैं। हालांकि, मसौदा मतदाता सूची के मुकाबले अंतिम सूची में 8.64 लाख मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है। मसौदा सूची में 1 करोड़ 7 लाख से अधिक नाम शामिल नहीं किए गए थे।
अंतिम मतदाता सूची में 2.25 करोड़ से अधिक पुरुष, 2.29 करोड़ महिलाएं और 2,841 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। सूची में 18 से 19 साल की उम्र के 6.83 लाख से अधिक मतदाता हैं, जबकि 85 साल से ज्यादा उम्र के मतदाताओं की संख्या 3.92 लाख से अधिक है। मसौदा सूची से 80.62 लाख नाम ऐसे मतदाताओं के हटाए गए थे, जो दूसरे स्थान पर चले गए थे या जिनका सत्यापन नहीं हो पाया था। इसके अलावा, 16.39 लाख मृत मतदाताओं के नाम, 7 लाख से अधिक दोहराए गए नाम और 3.83 लाख अन्य श्रेणी के नाम हटाए गए थे। जिन मतदाताओं के नाम स्थान बदलने या पता नहीं चल पाने के कारण हटाए गए थे, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरना था।
नए मतदाताओं समेत कुल 7,87,534 आवेदन
चुनाव अधिकारियों को नए मतदाताओं समेत कुल 7,87,534 आवेदन मिले। मतदाता कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर विधानसभा क्षेत्र के अनुसार अंतिम मतदाता सूची देख सकते हैं। इसके अलावा, निर्वाचन आयोग के मतदाता खोज पोर्टल पर भी अपना नाम जांच सकते हैं। इसके लिए ‘सर्च बाय EPIC’ विकल्प चुनकर वोटर आईडी नंबर दर्ज करना होगा, राज्य के रूप में कर्नाटक चुनना होगा और कैप्चा भरकर सर्च करना होगा। अगर ‘नो रिजल्ट फाउंड’ दिखाई देता है, तो नाम कटने की पुष्टि करने से पहले आधिकारिक मतदाता सूची में विवरण जांचना या चुनाव अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि किसी भी पात्र नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग और फर्जी आपत्तियों की जांच कराने तथा कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही है साथ ही लोगों से अपील की है कि वह नाम जांचें और नाम गायब होने पर फॉर्म 6 भरकर दोबारा आवेदन करें। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इस बड़े पैमाने पर हुई कटौती पर कड़ी आपत्ति जताई है।