ट्रंप टैरिफ से भारत को फिलहाल राहत; ट्रंप ने दिखाई नरमी, रूस से तेल खरीद पर कई प्रतिबंधों पर दी छूट
18 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर कर लागू किए गए 'ग्राहम एक्ट' का मकसद रूस के ऊर्जा राजस्व को तोड़ना और रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाना था।
वाशिंगटन/ नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार, 17 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी आदेश जारी करते हुए 'लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' के तहत रूस और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर लागू होने वाले कई नए प्रतिबंधों, उनसे जुड़े नियमों और टैरिफ से छूट देने की घोषणा की है।
ट्रंप प्रशासन ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब कानून लागू होने के 30 दिनों की समय-सीमा पूरी होने वाली थी। ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को भेजी अपनी रिपोर्ट और प्रमाण पत्र में स्पष्ट किया कि यह छूट इस समय "संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हित में" है।
क्या है 'ग्राहम एक्ट 2026' और ट्रंप का नया एग्जीक्यूटिव ऑर्डर?
18 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर कर लागू किए गए 'ग्राहम एक्ट' का मकसद रूस के ऊर्जा राजस्व को तोड़ना और रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाना था।
तगड़ा शुल्क प्रावधान: इस कानून में रूस से आने वाली वस्तुओं पर 500% तक और रूसी कच्चे तेल/प्राकृतिक गैस के टॉप 5 सबसे बड़े खरीदार या प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों से आने वाले सामानों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
अनुच्छेद 115 का प्रयोग: ट्रंप ने आदेश में 'ग्राहम एक्ट' की धारा 115 का प्रयोग किया है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हितों के आधार पर प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट देने का अधिकार देती है।
किन शुल्कों में छूट: ट्रंप ने कानून की धारा 112 और 113 के तहत रूसी सामानों और रूसी तेल और गैस के खरीदार देशों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्कों और धारा 102 से 111 और 117 के तहत तय नए वित्तीय और प्रशासनिक प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।
अमेरिकी प्रशासन की नजर: 18 अक्टूबर 2026 से खरीद पर निगरानी
भले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने तत्काल प्रभाव से कड़े शुल्कों से छूट दे दी है, लेकिन अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अपनी पकड़ पूरी तरह ढीली नहीं की है।आदेश के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को विदेश, ट्रेजरी और ऊर्जा मंत्रालयों के साथ मिलकर उन देशों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है जो रूसी कच्चे तेल और गैस की नई खरीदारी कर रहे हैं।
कानून में प्रावधान है कि जो देश रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष 5 खरीदारों में शामिल हैं और 18 अक्टूबर 2026 को या उसके बाद जानते हुए नई खरीदारी करते हैं, उन पर USTR की ओर से रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में कभी भी दोबारा टैरिफ लगाया जा सकता है।
ट्रंप ने यह भी साफ किया है कि यह छूट केवल नए कानून (ग्राहम एक्ट) के तहत मिली है; पुराने आदेशों के तहत रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और तंत्र पर पहले से लागू मुख्य प्रतिबंध पूरी तरह से प्रभावी रहेंगे।
भारत और वैश्विक बाजार पर प्रभाव
अमेरिकी कांग्रेस की तरफ से पास किए गए इस सख्त कानून के बाद भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी, जो रूस से भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करते हैं। जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को अचानक बाधित होने से बचाने और अमेरिका में घरेलू ईंधन/गैसोलीन की कीमतों को नियंत्रित रखने के मकसद से ट्रंप प्रशासन ने यह छूट देने का रास्ता चुना है।
अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के कई सदस्यों ने ट्रंप के इस कदम की आलोचना करते हुए तर्क दिया है कि रूसी तेल पर ढील देने से मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के बीच अपना राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी। ट्रंप प्रशासन के पास इस आदेश के तहत भविष्य में वैश्विक ऊर्जा खरीद का आकलन करते हुए किसी भी समय इन छूटों को वापस लेने या संशोधनों को लागू करने की शक्तियां सुरक्षित रखी गई हैं।