SIR विवाद: विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च को राहुल ने कहा- शिवजी की बारात है कोई भी शामिल हो सकते हैं..
SIR विवाद में राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया. इस मार्च को राहुल गांधी ने शिवजी की बारात बताया और बोले इसमें कोई भी शामिल हो सकते हैं. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की रोक और विपक्ष के 11 नेताओं ने वोटरों के नाम काटने को लेकर याचिका लगाई।
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026। 12 अक्टूबर को देश की राजधानी दिल्ली में दो मार्च निकाले गए. एक मार्च विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाला, तो दूसरा कांग्रेस सांसद के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कार्रवाई की मांग को लेकर था. यानी इस दिन दोनों तरफ से प्रदर्शन हुए. इस पूरे घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की भूमिका चर्चा में रही.
राहुल गांधी ने बोले..
12 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े 11 बजे नेता विपक्ष राहुल गांधी अपने सरकारी बंगले, 5 सुनहरी बाग रोड से निकले और कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन पहुंचे. यहां करीब 40 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सवाल उठाया कि भारत की राजधानी दिल्ली जेल क्यों बन गई है? उन्होंने कहा कि यह लड़ाई चार मोर्चों पर है और विपक्ष सड़क के साथ-साथ विचारों के स्तर पर भी लड़ रहा है.
राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा कि ज्ञानेश कुमार को सरकारी गवाह बन जाना चाहिए. जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या उनकी ज्ञानेश कुमार से कोई बात हुई है, तो राहुल ने कहा कि उन्हें मैसेज आ रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 200 अधिकारी उनके संपर्क में हैं.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर भी सवाल पूछा गया कि क्या दो अलग-अलग विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इस पर राहुल गांधी ने आंदोलन को शिवजी की बारात बताया, जिसमें कोई भी शामिल हो सकता है. उन्होंने कहा कि आंदोलन का मकसद ज्ञानेश कुमार को हटाना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही तय करना है.
इसके बाद राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को मार्च निकालने का ऐलान किया. उन्होंने लोगों से कनॉट प्लेस के बाराखंभा प्वॉइंट पर जुटने और वहां से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की अपील की.
CJI सूर्यकांत ने विपक्षी सांसदों से मिलने से क्यों मना किया?
विपक्ष के मार्च का मकसद समझने के लिए एक दिन पीछे जाना होगा. 11 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को चिट्ठी लिखकर ज्ञापन सौंपने के लिए मुलाकात का वक्त मांगा था. उसी रात CJI का जवाब आ गया और उन्होंने मिलने से मना कर दिया.
CJI ने अपने जवाब में कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक करना 'सेपरेशन ऑफ पावर्स', यानी शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ होगा. यह सिद्धांत संविधान के बुनियादी ढांचे का हिस्सा है. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास चिट्ठी में उठाए गए मुद्दों से निपटने के लिए जरूरी अधिकार नहीं हैं.
हालांकि, CJI ने आगे का रास्ता भी बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे ही कुछ मामलों की सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी है. विपक्षी सांसद 12 अक्टूबर को सुबह साढ़े 10 बजे से शाम साढ़े 4 बजे के बीच सुप्रीम कोर्ट में याचिका जमा कर सकते हैं.
12 अक्टूबर की सुबह जब CJI से पूछा गया कि चिट्ठी में क्या लिखा था, तो उन्होंने कहा कि यह विपक्षी सांसदों से पूछिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले हैं.
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विपक्ष CJI और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करता है और याचिका दायर करने का सुझाव आगे का रास्ता है. CPI नेता डी राजा ने बताया कि सांसद मार्च करेंगे, जबकि INDIA गठबंधन के 10 नेता याचिका पर दस्तखत करके उसे सुप्रीम कोर्ट में जमा करेंगे. उनकी मांगों में SIR पर रोक और मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा शामिल है.
विपक्षी सांसदों का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च
इसके बाद विपक्षी सांसद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इकट्ठा हुए. वहां पहले नारेबाजी हुई. समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, शिवसेना (उद्धव गुट) के संजय राउत, JMM की महुआ माझी और TMC की महुआ मोइत्रा समेत कई जाने-माने नेता नजर आए. करीब ढाई बजे बसें रवाना हुईं. इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, तेजस्वी यादव और मनोज झा समेत कई नेता मौजूद थे. बस में AISA नेता नेहा बोरा और एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव भी थे.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, डिप्टी सीएम भट्टी विक्रमार्क, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, सांसद और विधायक भी प्रदर्शन में पहुंचे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस ने अपने चारों मुख्यमंत्रियों, सभी राज्यों के नेता विपक्ष और प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया था. कांग्रेस मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए बड़ा टेंट लगाया गया. वहीं, लखनऊ से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी दिल्ली के लिए रवाना हुए.
करीब 3 बजे बसें बाराखंभा रोड पहुंचीं. असद रहमान की रिपोर्ट के मुताबिक, बसों के पहुंचते ही वहां भीड़ बढ़ने लगी और नेता सुप्रीम कोर्ट की तरफ बढ़ने लगे. विपक्षी नेताओं ने इस दौरान अपने-अपने बयान दिए और मार्च के मकसद को सामने रखा.
दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशन बंद, 30 हजार से ज्यादा जवान तैनात
अब उस शहर का हाल देखिए, जिसकी सड़कों पर यह सब हो रहा था. 12 अक्टूबर की सुबह दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने X पर पोस्ट कर सेंट्रल दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशन बंद करने की जानकारी दी. इसकी वजह सुरक्षा बताई गई.
सुप्रीम कोर्ट में वकीलों के साथ बदसलूकी का मुद्दा उठा
अब चलते हैं सुप्रीम कोर्ट, जहां तक विपक्ष ने मार्च निकाला था. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष प्रदीप राय और वरिष्ठ वकील आत्माराम नाडकर्णी ने 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों के साथ हुई बदसलूकी का मुद्दा उठाया.
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की. CJI ने कहा कि इस मामले पर 13 अक्टूबर को विस्तार से सुनवाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक गतिविधियां होनी चाहिए और उनसे कोई परेशानी नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए.
CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं है और अदालत को इस तरह के मामलों में नहीं घसीटा जाना चाहिए. वकीलों, कोर्ट स्टाफ और मुकदमा लड़ने वालों की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए.
इसके बाद वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने नई याचिका का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि वकीलों को सड़कों पर घसीटा गया. वरिष्ठ वकील शादान फरासत को घसीटे जाने के दृश्य लोगों ने देखे. दिनेश द्विवेदी और उत्तरा बब्बर को बसों में हिरासत में रखा गया.
शंकरनारायणन ने कहा कि अदालत वकीलों से संयम रखने की बात करती है और उम्मीद है कि एक दिन पुलिस से भी यही बात कही जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग लाठियां लेकर घूम रहे हैं, बच्चों के सिर पर वार कर रहे हैं और बाद में वीडियो डालकर इस पर गर्व जता रहे हैं, जबकि पुलिस कुछ नहीं कर रही.
CJI ने इस पर फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने इतना जरूर कहा कि बार के हर सदस्य को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन तय जगहों पर होना चाहिए. यहां तय जगहों वाली बात अहम है, क्योंकि 12 अक्टूबर को ही दिल्ली में प्रदर्शन की तय जगहों की सूची में बदलाव किया गया था.
SCBA ने अपनी याचिका में हिरासत के मामलों पर पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. इसके अलावा, शामिल पुलिस अधिकारियों की पहचान करने और CCTV फुटेज, हिरासत के रिकॉर्ड तथा बॉडी कैमरे की फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई है. इन सभी याचिकाओं पर 13 अक्टूबर को सुनवाई होनी है.
जंतर-मंतर अब प्रदर्शन की तय जगह
दोपहर तक खबर आ गई कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के स्टैंडिंग ऑर्डर के मुताबिक, जंतर-मंतर अब प्रदर्शन की तय जगह नहीं है. उसकी जगह तीन नए मैदानों को चुना गया है—रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD मैदान. आदेश में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन के लिए दूसरी जगहों की तलाश करने के लिए एक कमेटी बनाई थी. उसी की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को तय प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया है.
यह आदेश 28 अप्रैल 2022 के पुराने आदेश में कुछ बदलाव करता है. नई जगहों पर प्रदर्शन की इजाजत लेने की प्रक्रिया के लिए अलग से नियम जारी किए जाएंगे. यानी जगहें तय कर दी गई हैं, लेकिन वहां प्रदर्शन की इजाजत कैसे मिलेगी, यह अभी साफ नहीं है. CJP ने इस फैसले का विरोध किया. सौरव दास ने कहा कि यह मंजूर नहीं है और सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से डरते क्यों हैं. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और अब पूरा देश ही जंतर-मंतर है.