• महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारी को तलब किया

    सीजेआई सूर्यकांत बोले—पुलिस को आरोपों पर देना होगा स्पष्टीकरण; गुरुवार को होगी सुनवाई, पत्रकारों की सुरक्षा के लिए दायर याचिकाओं पर भी विचार।

    नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आरोपों पर स्पष्टीकरण देने को कहा। यह मामला नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) की ओर से दायर याचिका का उल्लेख किए जाने के बाद सामने आया, जिसमें प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

    वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। इस पर सीजेआई ने कहा, 'हम चाहेंगे कि कोई वरिष्ठ अधिकारी यहां उपस्थित रहे और स्पष्टीकरण दे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस को लगाए गए आरोपों पर जवाब देना होगा। जयसिंह ने अदालत को बताया कि इस संबंध में सॉलिसिटर जनरल को पहले ही सूचना दे दी गई है। पीठ ने याचिका को पुलिस कार्रवाई से संबंधित अन्य मामले के साथ गुरुवार को सूचीबद्ध करने की बात कही।

    पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अवमानना याचिका
    सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने फ्रीडम स्पीच कलेक्टिव की ओर से दायर अवमानना याचिका का भी उल्लेख किया। इसमें आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने पत्रकारों के साथ मारपीट कर सुप्रीम कोर्ट के 10 अक्टूबर के आदेश का उल्लंघन किया। उस आदेश में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले मीडियाकर्मियों को परेशान नहीं करने की बात कही गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने भी इसी तरह की एक अन्य याचिका का उल्लेख किया। इन याचिकाओं में पत्रकारों के काम में पुलिस के कथित हस्तक्षेप और उनके साथ किए गए व्यवहार पर सवाल उठाए गए हैं।

    पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र रिपोर्टिंग की मांग
    एनडब्ल्यूएमआई ने अपनी रिट याचिका में केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है कि विरोध प्रदर्शनों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और गरिमा बनी रहे। याचिका के अनुसार, पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए मौजूदा व्यवस्था में पत्रकारों की विशिष्ट समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन स्थलों तक पत्रकारों की पहुंच, उनकी हिरासत, जबरन हटाए जाने और स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों जैसे मुद्दों पर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।