1,000 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में कारोबारी महेंद्र गोयनका फरार, रायपुर पहुंची कोलकाता पुलिस
भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों से जुड़ी करीब 1,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों और शेयरों में कथित धोखाधड़ी के मामले में कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस की टीम रायपुर पहुंची, लेकिन मुख्य आरोपी कारोबारी महेंद्र गोयनका के फरार होने की जानकारी सामने आई है। मामले में पांच हजार शेयरों के मालिकाना हक को लेकर जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप हैं।
रायपुर, 8 नवंबर 2026। कटनी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों से जुड़ी लगभग 1,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों और शेयरों में कथित धोखाधड़ी के मामले में कोलकाता पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। कोलकाता उच्च न्यायालय से नया गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस की विशेष टीम आरोपियों को पकड़ने के लिए रायपुर पहुंची है। पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही मुख्य आरोपी कारोबारी महेंद्र गोयनका अपने पूरे परिवार के साथ फरार हो गए। स्थानीय निवासियों की सहायता से पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।
कोलकाता पुलिस की इस विशेष टीम का मकसद आरोपियों को गिरफ्तार करके कोलकाता की अदालत में प्रस्तुत करना है, जिससे आगे की पूछताछ के लिए उनकी पुलिस रिमांड हासिल की जा सके। यह संपूर्ण मामला यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्रा. लि. और उससे संबंधित अन्य कंपनियों के शेयरों पर कथित तौर पर अवैध अधिकार जमाने के षड्यंत्र से जुड़ा हुआ है।
5,000 शेयरों के मालिकाना हक पर विवाद
कोलकाता के बोबाजार थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, महेंद्र गोयनका और उनके सहयोगियों पर कूटरचित दस्तावेज, जाली हस्ताक्षर और कंपनियों की नकली मुहरों का उपयोग करके शेयरों का मालिकाना हक बदलने का गंभीर आरोप है। इस मामले में शिकायतकर्ता एडमिट विनट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक गोपाल कुमार यादव हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी कंपनी के पास व्यू टेक मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के 5,000 इक्विटी शेयर मौजूद थे। एडमिट विनट्रेड प्राइवेट लिमिटेड ने इन शेयरों को फ्यूचर डीलट्रेड प्राइवेट लिमिटेड से क्रय किया था।
शिकायत में बताया गया है कि सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के उपरांत 4 फरवरी 2018 को ये सभी शेयर आधिकारिक रूप से एडमिट विनट्रेड के नाम पर पंजीकृत किए गए थे। इस लेन-देन से संबंधित मूल शेयर प्रमाण पत्र भी शिकायतकर्ता के पास सुरक्षित रखे हुए हैं।
जालसाजी और फर्जी बोर्ड मीटिंग के आरोप
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने 6 जुलाई 2018 की तिथि में एक फर्जी बोर्ड बैठक का प्रस्ताव तैयार किया। इस जाली प्रस्ताव के आधार पर वित्तीय वर्ष 2016-17 का संशोधित वार्षिक रिटर्न (एमजीटी-7) दाखिल कर दिया गया। इस दस्तावेज में यह दर्शाया गया कि 9 मार्च 2017 को ही 5,000 शेयर फ्यूचर डीलट्रेड से महेंद्र गोयनका एंड संस के नाम पर हस्तांतरित किए जा चुके थे।
शिकायतकर्ता का स्पष्ट कहना है कि उनकी कंपनी ने कभी भी इन शेयरों को बेचने की कोई सहमति प्रदान नहीं की थी और न ही इसके बदले में कोई धनराशि प्राप्त की थी। शेयर हस्तांतरण से संबंधित किसी भी दस्तावेज पर कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर नहीं थे।
एफआईआर में कई कारोबारी शामिल
बोबाजार पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी में महेंद्र गोयनका को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने उनके अतिरिक्त अभिषेक अग्रवाल, अशोक रैकवार, मनीष गोयनका, सुरेंद्र सिंह सलूजा और धनेश शिवहरे को भी नामजद आरोपी बनाया है। इसके साथ ही महेंद्र गोयनका एंड संस और सुशील गोयनका एंड संस नामक व्यावसायिक फर्मों का भी प्राथमिकी में स्पष्ट उल्लेख किया गया है। वकीलों और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, महेंद्र गोयनका के भाई, पत्नी और उनके परिवार के हिंदू अविभाजित परिवार के विरुद्ध भी धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कंपनियों के शेयरों पर अनुचित नियंत्रण की साजिश
इस कानूनी विवाद के केंद्र में विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियां भी शामिल हैं। महेंद्र गोयनका ने कटनी में इन कंपनियों के साथ करोड़ों रुपये का कारोबार किया था। इसी वित्तीय लेन-देन के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई और कंपनियों के शेयरों पर अनुचित नियंत्रण प्राप्त करने की साजिश रची गई। कोलकाता पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज के उपयोग से जुड़े प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज किया है और रायपुर में आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी रखी है।